नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सिरमौर जिले में नदियों और जल स्रोतों के पास हो रहे अवैध निर्माण और मलबे की डंपिंग के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। एनजीटी ने जिला दंडाधिकारी (डिप्टी कमिश्नर) सिरमौर को निर्देश दिए हैं कि वे इस संबंध में मिली शिकायत की जमीनी स्तर पर जांच कर दो महीने के भीतर उचित सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करें। याचिकाकर्ता नाथुराम चौहान की ओर से दायर ओरिजिनल एप्लीकेशन में आरोप लगाया गया था कि नदियों और जल निकायों के 100-150 मीटर के दायरे में माइनिंग इंस्पेक्शन पोस्ट और वेब्रिज का अवैध निर्माण किया जा रहा है।




इसके अलावा वहां अवैध रूप से मलबे और कचरे की डंपिंग का भी आरोप लगाया गया। याचिका में कहा गया था कि इन गतिविधियों के कारण लगातार भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है। मामले की सुनवाई कर रहे चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने पाया कि पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोपों की सत्यता जांचने के लिए जमीनी स्तर पर सत्यापन आवश्यक है। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि इस मामले में जिला दंडाधिकारी, सिरमौर (नाहन) के समक्ष पहले ही एक शिकायत दी जा चुकी थी, जिस पर कोई निर्णय नहीं हुआ था। इसे ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने मामले का निस्तारण करते हुए जिला कलेक्टर को आदेश दिया है कि वे इस शिकायत पर जल्द से जल्द विचार करें और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

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