उत्तरी भारत के प्रसिद्ध शिवधाम भरमौर में स्थित चौरासी मंदिर परिसर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रहस्यों और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा अनोखा स्थल भी है। यहां मौजूद धर्मराज का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि मृत्यु के बाद जीवात्मा के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा इसी स्थान पर होता है और धर्मराज की कचहरी में कर्मों के आधार पर निर्णय लिया जाता है। मणिमहेश यात्रा के दौरान देशभर से भरमौर पहुंचने वाले श्रद्धालु धर्मराज के दर्शन के लिए भी मंदिर में आते हैं।


धर्मराज मंदिर के ठीक सामने चित्रगुप्त का आसन बना हुआ है। मंदिर की सीढ़ियों के पास एक गुप्त यंत्र स्थापित होने की भी धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि इसी यंत्र के माध्यम से धर्मराज जीव के कर्मों का हिसाब रखते हैं। मंदिर के समीप बनी ढाई सीढ़ियों को स्वर्ग का द्वार माना जाता है। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस स्थान को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं।


धर्मराज की कचहरी में सवाल-जवाब की मान्यता

धर्मराज मंदिर से जुड़ी सबसे रोचक मान्यता यह है कि यहां मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का लेखा-जोखा होता है। कई सिद्ध पुरुषों ने धर्मराज की कचहरी में होने वाले सवाल-जवाब सुनने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों के प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। मंदिर की धार्मिक पहचान मुख्य रूप से लोकमान्यताओं और श्रद्धालुओं की आस्था पर आधारित है।

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