शादी का वादा करने के बाद रिश्ता टूट जाना हर स्थिति में अपराध नहीं माना जा सकता। शिमला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में आनी, कुल्लू निवासी आरोपी युवक को बरी कर दिया है।


अदालत ने मामले में स्पष्ट किया कि केवल शादी का वादा टूट जाना अपने आप में अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी की नीयत शुरुआत से ही धोखा देने की थी। यानी यदि शुरुआत में शादी करने का इरादा था, लेकिन बाद में परिस्थितियों के कारण रिश्ता नहीं हो पाया, तो इसे स्वतः आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। मामले के अनुसार युवक और युवती की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। दोस्ती आगे बढ़ी और दोनों करीब 10 माह तक एक कमरे में मिलते रहे। इस दौरान दोनों के बीच शादी को लेकर भी बात हुई थी।

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