प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जाने वाली ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता जांच को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है। अब सड़क के किसी महत्वपूर्ण सीमेंट कंक्रीट हिस्से में मिली खराब गुणवत्ता का असर पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता ग्रेडिंग पर पड़ेगा।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नियुक्त मुख्य अभियंता को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।

10 फीसदी हिस्सा खराब तो पूरी सड़क की गुणवत्ता असंतोषजनक

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से को लेकर है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की किसी सड़क की कुल लंबाई में यदि सीमेंट कंक्रीट वाले हिस्से की हिस्सेदारी 10 फीसदी या उससे अधिक है और गुणवत्ता जांच के दौरान यह हिस्सा असंतोषजनक पाया जाता है, तो पूरी सड़क की गुणवत्ता को भी असंतोषजनक माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि सड़क का अधिकांश हिस्सा यदि ठीक भी पाया जाता है, लेकिन उसमें शामिल महत्वपूर्ण सीमेंट कंक्रीट हिस्से में गंभीर गुणवत्ता संबंधी खामी मिलती है, तो अंतिम गुणवत्ता जांच में पूरी सड़क को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। नई व्यवस्था से सीमेंट कंक्रीट से बनाए गए हिस्सों की गुणवत्ता को अलग से महत्व मिलेगा और इन्हें पूरी सड़क की अंतिम गुणवत्ता जांच से अलग नहीं माना जाएगा।

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