हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में लगातार बढ़ रहे गाद के जमाव पर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव अर्चना वर्मा ने मुख्य सचिव केके पंत को पत्र भेजकर जलाशयों से गाद निकालने के लिए मिशन मोड में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने आगाह किया है कि समय रहते सेडिमेंट मैनेजमेंट नहीं किया गया तो जलाशयों की उपयोगिता और जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।


केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में सामने आया है कि हिमाचल के कई जलाशयों की मूल लाइव स्टोरेज क्षमता में 25 फीसदी से अधिक की कमी हो चुकी है। लगातार गाद जमा होने से इन जलाशयों में पानी संग्रह करने की क्षमता घट रही है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो भविष्य में जलाशयों की उपयोगिता और कम हो सकती है। बाद के चरण में गाद निकालने की प्रक्रिया अधिक महंगी और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। जलाशयों की घटती भंडारण क्षमता का असर केवल पानी संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हिमाचल में जलविद्युत उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए गाद प्रबंधन की अनदेखी से भविष्य में बिजली उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है।

छोटे जलाशयों में स्थानीय लोगों की भागीदारी

केंद्र ने छोटे बांधों और जल निकायों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है। पत्र में बताया गया है कि कई छोटे जलाशय सूखे के मौसम में पूरी तरह या काफी हद तक सूख जाते हैं। ऐसे स्थानों पर भारी मशीनरी के बजाय स्थानीय स्तर पर गाद निकाली जा सकती है। इसके लिए वीबी-जी रामजी-2026 योजना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। केंद्र के अनुसार दूसरे राज्यों में इस तरह के मॉडल का सफल प्रयोग किया गया है।

Source: Read original article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *