कभी चरस तस्करी के लिए चर्चा में रही पार्वती घाटी में अब कथित रेव पार्टियों के आयोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डीजे और म्यूजिक इवेंट की आड़ में बड़े स्तर पर होने वाली पार्टियों तथा इनमें नशीले पदार्थों के सेवन के आरोपों ने घाटी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जून 2026 में कसोल के पास आयोजित कार्यक्रमों के बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।

सोशल मीडिया से महीनों पहले शुरू होता है प्रचार

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पार्वती घाटी में रेव पार्टियों का आयोजन लंबे समय से होता रहा है। आयोजक कार्यक्रमों की तैयारियां और प्रचार कई सप्ताह पहले शुरू कर देते हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इनके प्रचार का माध्यम बनते हैं। इन आयोजनों में देश-विदेश से पर्यटकों के पहुंचने की बात भी सामने आती रही है। हालांकि, घाटी में ऐसी पार्टियों की कुल संख्या, अवैध कारोबार का वास्तविक आर्थिक आकार और कितने आयोजनों में नशीले पदार्थों का कारोबार होता है, इसका स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

जून की पार्टी के बाद हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

जून 2026 में कसोल के पास ग्रीन फॉरेस्ट-1 और ग्रीन फॉरेस्ट-2 में 7 से 11 जून तक कार्यक्रम आयोजित किए गए। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, आयोजकों ने साउंड सिस्टम और म्यूजिक इवेंट के लिए अनुमति ली थी। पुलिस के एक अधिकारी की 5 जून की रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन और अवैध गतिविधियों की आशंका जताई गई थी, लेकिन 6 जून को साउंड परमिशन दे दी गई।

9 जून को हाईकोर्ट की अवकाश पीठ ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। अदालत के रिकॉर्ड में कार्यक्रम स्थल पर शराब की बोतलें, रोलिंग पेपर, डीजे सिस्टम और बड़ी संख्या में लोगों के ठहरने की व्यवस्था मिलने का उल्लेख है। पुलिस ने दो पर्यटकों को कोकीन और एलएसडी के साथ पकड़े जाने की जानकारी भी अदालत को दी। 

हाईकोर्ट ने कुल्लू के अधिकारियों के तबादले के आदेश दिए

24 जून 2026 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक मदन लाल कौशल और सदर एसडीएम निशांत ठाकुर के तबादले के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि प्रशासन बड़े स्तर पर आयोजित रेव पार्टियों को रोकने में विफल रहा और अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। साथ ही विभागीय कार्रवाई तथा एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए गए।  अदालत ने यह भी कहा कि कार्यक्रम के लिए अनुमति देने से पहले पुलिस की प्रतिकूल रिपोर्ट पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए आगे की जांच के निर्देश जारी किए।

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