हिमाचल प्रदेश के नौ गांवों के 486 परिवारों पर किए गए अध्ययन में रोजगार और शिक्षा की कमी को पलायन के प्रमुख कारणों में शामिल पाया गया। अध्ययन में शामिल अधिकतर लोग नियमित रूप से गांव लौटते रहे। बाहर रहकर कमाई करने वाले कई लोगों ने परिवारों को पैसे भेजे, जिनका इस्तेमाल घरेलू खर्च, कृषि और शिक्षा पर हुआ।

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क्यों गांव छोड़ रहे हिमाचली? अध्ययन में खुलासा
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

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बेहतर रोजगार और शिक्षा की तलाश में हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों से लोग बाहर जरूर जा रहे हैं, लेकिन अपनी जड़ों से उनका जुड़ाव बरकरार है। राज्य के नौ जिलों के नौ गांवों में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों का पलायन मुख्य रूप से अस्थायी प्रकृति का था। वे समय-समय पर अपने गांव लौटते रहे और परिवारों से जुड़े रहे। यह शोधपत्र हाल ही में फ्रंटियर्स इन ह्यूमन डायनेमिक्स शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन मंडी जिले के धनरासी, चंबा के भरमाला, सिरमौर के बटोल, सोलन के कियारटू, कांगड़ा के राख, कुल्लू के मेहा, शिमला के फिरनू, किन्नौर के सार्यो और लाहौल-स्पीति के करदांग गांवों में किया गया।


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