हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदाएँ—पानी और खनिज—लगातार बाहरी राज्यों और माफियाओं के हाथों लूटी जा रही हैं। व्यास नदी और पौंग डैम से निकलने वाले पानी से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को फायदा हो रहा है, लेकिन हिमाचल को उसका हक अब तक नहीं मिला। वहीं, स्टोन क्रेशर माफिया नदी के किनारों को छलनी कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है। यह आरोप डॉ. अशोक कुमार सोमल (स्वराज सत्याग्रही, पर्यावरण प्रेमी ने लगाया है।
पानी हमारा, पर हक दूसरों का!
उन्होंने बताया व्यास नदी पर बने पण्डोह डैम और पौंग डैम से हिमाचल के पानी को पंजाब और अन्य राज्यों की नहरों में मोड़ा गया, जिससे उन राज्यों में सिंचाई और बिजली उत्पादन हो रहा है। लेकिन हिमाचल को इसके बदले में सिर्फ 7.22% हिस्सेदारी मिलनी थी, जो अब तक अधूरी है। यह न्यायिक और राजनीतिक असफलता का जीता-जागता उदाहरण है।
खनन माफिया का आतंक: सरकार मौन!
अशोक कुमार सोमल ने बताया फतेहपुर और इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में 7 से 8 स्टोन क्रेशर रात-दिन व्यास नदी के पेट से रेत और बजरी निकाल रहे हैं। इससे नदी का प्रवाह बदल रहा है, जिससे आने वाले समय में पौंग डैम और पंजाब के बैराज को भी खतरा हो सकता है। इस अंधाधुंध खनन पर प्रशासनिक नियंत्रण न के बराबर है, क्योंकि राजनीतिक दलों के कई नेताओं के खुद के या रिश्तेदारों के स्टोन क्रेशर चल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में जाएगी लड़ाई!
सोमल ने बताया इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे न्यायालय तक ले जाने की ठानी है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जल और खनिज संसाधनों की लूट को रोकने की मांग की जाएगी।
अब सवाल उठता है:
- क्या हिमाचल को उसके संसाधनों का हक दिलाने के लिए कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगा?
- कब तक खनन माफिया बिना रोक-टोक प्रदेश की नदियों और पहाड़ों को तबाह करते रहेंगे?
- क्या न्यायपालिका इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करेगी?
यदि इस पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह क्षेत्र भविष्य में एक बड़े प्राकृतिक और आर्थिक संकट की चपेट में आ सकता है।