आईआईटी मंडी परिसर में जन्माष्टमी समारोह के दौरान जातिगत टिप्पणी वाला भगवद्गीता आधारित पोस्टर लगाए जाने से विवाद खड़ा हो गया। पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों में बांटते हुए शूद्रों की भूमिका ‘उच्च वर्गों की सेवा करना’ बताई गई थी। मामला सामने आने पर संस्थान ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।

संस्थान का दावा है कि जन्माष्टमी का कार्यक्रम छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था। यह संस्थान का आधिकारिक रूप से प्रायोजित या समर्थित कार्यक्रम नहीं था। कमेटी पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि विवादित पोस्टर किसने लगाया, क्यों लगाया और इसके पीछे क्या वजह थी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर संस्थान आगे की कार्रवाई करेगा। मामले की जांच के लिए गठित समिति में फैकल्टी सदस्यों के साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।


उधर, आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार डॉ. केएस पांडेय ने कहा कि इस तरह के पोस्टर या गतिविधियों को संस्थान किसी भी सूरत में समर्थन नहीं करता। कहा कि संस्थान अपनी नीतियों के अनुरूप ही पूरे मामले में कार्रवाई करेगा। वहीं, आईआईटी मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि पोस्टर छात्रों के एक कार्यक्रम का हिस्सा था और कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की अपने तरीके से व्याख्या की है। कुछ छात्रों ने गीता की अपने तरीके से व्याख्या की है।बेहरा ने कहा कि आईआईटी मंडी समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और संविधान में निहित अन्य मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

Source: Read original article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed