
डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
हिमाचल में बागवानों को एक हेक्टेयर क्षेत्र में बगीचा लगाकर लाखों रुपये कमाने के सपने दिखाने वाले डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पास 397.27 हेक्टेयर जमीन बेकार पड़ी है। इस पर न खेती की जा रही है, न बगीचा है और न ही कोई नर्सरी तैयार की गई है। विवि को हर साल सरकार से अनुदान की दरकार रहती है। विश्वविद्यालय के पास कुल 773.91 हेक्टेयर जमीन है। इसमें से करीब 397.27 हेक्टेयर यानी 51.33 फीसदी जमीन का सही उपयोग नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय की अपने सभी स्रोतों से आय 33.31 से 50 करोड़ रुपये के आसपास ही बैठती है। विश्वविद्यालय को कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, आकस्मिक खर्च और आपूर्ति एवं सेवाओं समेत विभिन्न मदों के लिए सरकार से अनुदान मिलता है। बढ़े हुए खर्चों और नई योजनाओं के लिए भी सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट में 773.91 हेक्टेयर भूमि इसके पास होने का उल्लेख है जिसे हाल ही में विधानसभा सचिवालय के समक्ष भी रखा गया। इस रिपोर्ट में 397.27 हेक्टेयर भूमि खेती के इस्तेमाल में नहीं होने पर विश्वविद्यालय के स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर आय बढ़ाने की जरूरत बताई गई। यह रिपोर्ट राज्य लेखा परीक्षा विभाग की आपत्तियों के जवाब में बनाई गई है। इस रिपोर्ट में विश्वविद्यालय का कहना है कि उसकी करीब आधी कृषि भूमि वैज्ञानिकों के प्रयोग, स्नातकोत्तर शोधार्थियों के अनुसंधान और स्नातक विद्यार्थियों की व्यावहारिक फील्ड ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होती है। शेष भूमि पर सब्जियों की खेती, फलदार बाग और फल एवं वन पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है। करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर फल, नर्सरी पौधे, वन पौधे, सब्जियों और दालों की सघन खेती शुरू की गई है। इसके बावजूद यह क्षेत्र काफी कम है।
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