हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोने की किट्टी स्कीम के नाम पर हुई लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पंजाब (जालंधर) के आभूषण व्यापारियों की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश विरेंद्र सिंह की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए साफ किया है कि भले ही आरोपी व्यापारी जालंधर से अपना कारोबार चलाते हों, लेकिन उनके खिलाफ मुकदमा हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में ही चलेगा। भुंतर के आभूषण कारोबारी ने जालंधर की एक कंपनी के मालिकों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि पंजाब के इन व्यापारियों ने भुंतर आकर उन्हें एक किट्टी स्कीम में शामिल होने का लालच दिया था।
उसने स्कीम के तहत कुल 2,823 ग्राम सोना जमा कराया, जिसमें से आरोपियों ने 1,803 ग्राम तो वापस कर दिया, लेकिन बचा हुआ करीब 65,28,000 रुपये कीमत का 1,020 ग्राम सोना वापस नहीं किया। जालंधर के व्यापारियों ने पहले कुल्लू की अदालत में अर्जी लगाई थी कि उनका सारा कारोबार पंजाब में है, इसलिए कुल्लू कोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई का कानूनी अधिकार (क्षेत्राधिकार) नहीं है। निचली अदालत ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने उनकी दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चूंकि इस मौखिक समझौते की शुरुआत और डील भुंतर (कुल्लू) स्थित नरेंद्र राणा की दुकान पर हुई थी, इसलिए इस मामले का मुख्य कारण हिमाचल में ही पैदा हुआ है।
Source: Read original article
