हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी सिविल जेल के अवमानना नोटिस को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही मामले को बिना वजह खींचने और याचिकाकर्ताओं की ओर से अर्जी वापस लेने की मांग करने पर याचिकाकर्ताओं पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रजिस्ट्रार ने दस्तावेज पेश कर साबित किया कि यूनिवर्सिटी ने कोर्ट के सभी आदेशों का समय-समय पर पूरी तरह पालन किया है।


कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिलने पर पीठ ने रजिस्ट्रार को दिए गए सिविल जेल के कारण बताओ नोटिस को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया। नोटिस रद्द होते ही याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी। इस पर पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मामले की प्रकृति को देखते हुए बिना भारी जुर्माने के याचिका वापस लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने दया भाव दिखाते हुए याचिकाकर्ताओं को 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ अर्जी वापस लेने की अनुमति दी। यह राशि 7 दिनों के भीतर चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।इसके साथ ही अदालत ने इस आवेदन का निपटारा कर दिया।

 

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