हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश में बड़ा संशोधन करते हुए पीड़ित पत्नी के गुजारा भत्ता की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।अदालत ने माना कि पति की 50 हजार कमाई है और उसके बावजूद भी पत्नी को 5 हजार रुपए गुजारा भत्ता देना अनुचित है। अदालत ने कहा कि 2011 से 2026 तक लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 184 से बढ़कर 384 हो गया है। 15 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान महिला को 5 हजार की मामूली राशि पर छोड़ना अनुचित है। हाईकोर्ट ने माना कि समय के साथ गुजारा भत्ते में नियमित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।





न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की पीठ ने फैमिली कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए याचिका स्वीकार करते हुए संशोधित गुजारा भत्ता प्रति माह 9 मार्च 2011 से 8 मार्च 2016 तक 5 हजार,9 मार्च 2016 से 8 मार्च 2021 तक 7 हजार और 9 मार्च 2021 से अप्रैल 2026 के लिए 9 हजार किया। इसके अलावा अगले 2-2 साल बाद 5 फीसदी की वार्षिक वृद्धि की बढ़ोतरी करने की आदेश दी है। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह पूर्व में दिए गए अंतरिम भत्ते का समायोजन करते हुए बकाए का भुगतान 4 सप्ताह के भीतर करे।

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