Shimla: Bajrang Lal Bagra said—Ashok Singhal awakened a sense of pride in cultural identity within Hindu socie

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा।
– फोटो : संवाद

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राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है, जब समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति भी गौरव का भाव रखे। यह बात विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने गेयटी थिएटर में अशोक सिंघल के जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में कही। कार्यक्रम में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।


बागड़ा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने हिंदू समाज में सांस्कृतिक पहचान को लेकर गर्व और आत्मविश्वास जगाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बाद अशोक सिंहल ने ऐसे संगठनात्मक प्रयास किए, जिनसे हिंदू समाज में अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिमाचल प्रांत संघचालक प्रो. वीर सिंह रांगड़ा ने अशोक सिंघल को ऋषि परंपरा का प्रतिनिधि और प्रखर राष्ट्रभक्त बताया। उन्होंने कहा कि सिंघल 24 वर्ष की आयु में संघ के प्रचारक बन गए थे। 36 वर्ष की उम्र में एक ही दिन में तीन बार हृदयाघात होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और राष्ट्रनिर्माण के कार्य में जुटे रहे। समारोह में अन्य वक्ताओं ने भी अशोक सिंघल के जीवन, संगठनात्मक योगदान और राष्ट्रसेवा के कार्यों को याद किया।

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