हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के साथ अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर की जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि हिमकेयर, आयुष्मान और सहारा योजनाएं बंद नहीं होंगी, बल्कि इनमें मौजूद कमियों को दूर कर इन्हें बेहतर बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य लोगों को घरद्वार आधुनिक इलाज उपलब्ध करवाना है। उन्होंने यह बात भाजपा वरिष्ठ विधायक विपिन सिंह परमार व अन्य की ओर से विधानसभा में नियम-130 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर लाए गए प्रस्ताव व इस पर हुई चर्चा के जवाब देते हुए कही।

शांडिल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में फैकल्टी, रेजीडेंट डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के कुल 6,365 स्वीकृत पदों में से 4,661 भरे जा चुके हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्टाफ नर्स के 1,938 पदों में 1,266 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 200 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। 117 असिस्टेंट स्टाफ नर्सों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। एनएचएम के तहत स्वीकृत 6,088 पदों में से 4,115 कर्मचारी कार्यरत हैं और शेष आउटसोर्स पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आईजीएमसी में नए लेक्चर थिएटर और परीक्षा हॉल का निर्माण तेजी से चल रहा है।

न्यूक्लियर मेडिसिन और मेडिकल ऑन्कोलॉजी के लिए अलग ब्लॉक भी तैयार किया जा रहा है। चमियाना स्थित अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी में आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। मेडिकल काॅलेजों के लिए रोबोटिक सर्जरी के अलावा उपकरणों की खरीद की जा रही है। नेरचौक, हमीरपुर और टांडा में कैथ लैब स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के 25 स्थानों पर 128 मशीनों के साथ डायलिसिस इकाइयां संचालित हैं। 11 नए विशेष नवजात शिशु देखभाल केंद्र और 17 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयां भी स्वीकृत की गई हैं। हमीरपुर में 264 बिस्तरों वाले स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए फंड जारी किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार केवल भवन और मशीनें लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी काम कर रही है।

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