Shimla: Alternative to chemicals in TB drug manufacturing; Ekta from HPU receives international recognition

एचपीयू की शोधार्थी एकता आर्य को कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने किया सम्मानित।
– फोटो : संवाद

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टीबी की दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों को तैयार करने के लिए हानिकारक रसायनों का विकल्प खोजने की दिशा में एचपीयू के बायोटेक विभाग की शोधार्थी एकता आर्य ने महत्वपूर्ण शोध किया है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग में पीएचडी कर रही एकता ने फफूंद से प्राप्त एंजाइम की मदद से रिफामाइसिन बी को रिफामाइसिन एस में बदलने की प्रक्रिया विकसित की है। रिफामाइसिन एस कई अर्ध-संश्लेषित औषधियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला मध्यवर्ती पदार्थ है। एकता ने चेन्नई में चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और जीवन विज्ञान में नवाचारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध प्रस्तुत किया। शोध से संबंधित भारतीय पेटेंट भी प्रकाशित हुआ है।




विवि के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने एकता और उनके शोध निर्देशक को बधाई दी। एकता ने शोध निर्देशक प्रो. दुनी चंद और अमित कुमार के साथ मिलकर अल्बिफिम्ब्रिया वेरुकैरिया नामक फफूंद से प्राप्त रिफामाइसिन ऑक्सीडेज एंजाइम का इस्तेमाल किया। एंजाइम ऐसे जैविक पदार्थ होते हैं, जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेजी से होने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया में एंजाइम ने रिफामाइसिन बी को रिफामाइसिन एस में बदलने का काम किया। पारंपरिक रासायनिक विधि के मुकाबले इस जैविक तरीके को अपनाने का उद्देश्य दवा निर्माण में हानिकारक पदार्थों के इस्तेमाल और उत्पादन को कम करने की संभावनाएं तलाशना है।

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