शिमला। न्यूज व्यूज पोस्ट,
हिमाचल प्रदेश में बिजली विभाग के भीतर मचे घमासान के बीच पूर्व इंजीनियर नेता और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के पूर्व एमडी सुनील ग्रोवर की गवाही ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है। उन्होंने हिमाचल पावर कारपोरेशन के पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत को लेकर कारपोरेशन के पूर्व एमडी IAS हरिकेष मीणा और निदेशक देशराज की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रोवर, जो अखिल भारतीय बिजली अभियंता फेडरेशन के संरक्षक भी हैं, ने अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा के समक्ष जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। वे लंबे समय से सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रहे हैं और उन पर कभी कोई भ्रष्टाचार या कदाचार का आरोप नहीं लगा। ऐसे में उनकी गवाही को हल्के में लेना आसान नहीं होगा।
ग्रोवर की गवाही के प्रमुख खुलासे:
1. भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: ग्रोवर ने बताया कि कैसे हिमाचल पावर कारपोरेशन में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी धांधली कर रहे थे और विमल नेगी उनके खिलाफ खड़े थे।
2. विमल नेगी पर दबाव: नेगी को भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन जब उन्होंने इससे इनकार किया, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
3. पुलिस की संदिग्ध भूमिका: इस मामले में पुलिस की जांच बेहद सुस्त और संदेहास्पद रही है। ग्रोवर ने सवाल उठाया कि क्या किसी दबाव में पुलिस कार्रवाई को धीमा किया जा रहा है?
4. गुडिया मामले से तुलना: ग्रोवर ने इसे गुडिया केस जितना ही गंभीर और संवेदनशील बताया, जहां न्याय की गुहार लगाने वालों को चुप कराने की कोशिश की गई थी।
क्या करेगी सरकार?
अब जब ग्रोवर की गवाही ने इस केस को एक नया मोड़ दे दिया है, तो सवाल उठता है कि ओंकार शर्मा की रिपोर्ट में क्या सामने आएगा? क्या पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी या फिर यह मामला भी राजनीतिक रसूख के दबाव में ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
आइए सुनील ग्रोवर ने अपनी गवाही में क्या आरोप लगाए है,
शपथ पत्र / गवाही
यह त्रासदी, जो कि अभियंता विमल नेगी पर घटी, इसका मुख्य कारण हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के सबसे भ्रष्ट, बेईमान, अहंकारी और अयोग्य प्रबंध निदेशक (एमडी) श्री हरिकेश मीणा तथा उनके सहयोगी, एक अन्य भ्रष्ट, असभ्य और उद्दंड अधिकारी, अभियंता देशराज (तत्कालीन निदेशक, विद्युत) द्वारा उन पर डाले गए दबाव और जबरन किए गए फैसलों का परिणाम प्रतीत होती है। एक ईमानदार और तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारी को इन अधिकारियों द्वारा अपनी मनमानी के अनुसार काम करने के लिए बाध्य किया गया और विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी गईं। विश्वसनीय सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि पिछले छह महीनों से उन्हें एक भी दिन का अवकाश नहीं दिया गया था।
भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के प्रमुख उदाहरण
HPPCL के अंतर्गत, हरिकेश मीणा (IAS) और अभियंता देशराज द्वारा किए गए भ्रष्टाचार, अक्षमता और मनमानी से जुड़े कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
१. पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना (32 मेगावाट)
पूर्ण लागत: ₹220 करोड़
निर्माण लागत प्रति मेगावाट: ₹6.8 करोड़
निर्धारित टैरिफ (HPPCL द्वारा दायर अनिवार्य याचिका के अनुसार): ₹4.90 प्रति यूनिट
भ्रष्टाचार के प्रमुख बिंदु:
a) इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को जानबूझकर हेरफेर करके लागत को बढ़ाया गया।
b) मार्च 2023 में टेंडर निकाला गया और 4 अप्रैल 2023 को खोला गया। उस समय सौर पीवी मॉड्यूल की कीमत ₹28 प्रति kWp थी, लेकिन 15 मई 2023 को जब परियोजना का ठेका दिया गया, तब कीमतें 20% गिर चुकी थीं। 15 दिन बाद कीमतें और 50% तक गिर गईं, लेकिन फिर भी HPPCL ने इन तथ्यों को ध्यान में रखकर दरों पर पुनर्विचार नहीं किया।
c) ₹220 करोड़ की लागत पर यह परियोजना अत्यधिक महंगे दामों पर सौंपी गई, जबकि राष्ट्रीय औसत ₹3.5 से ₹4 करोड़ प्रति मेगावाट था। वास्तविक लागत ₹120 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए थी।
d) यह परियोजना M/s Prozeal नामक एक फर्म को दी गई, जो प्रारंभिक ऑनलाइन बोली में अयोग्य थी, लेकिन बाद में अतिरिक्त दस्तावेज़ लेकर योग्य घोषित कर दी गई।
e) परियोजना के लिए ई-रिवर्स बोली (e-reverse bidding) नहीं करवाई गई।
f) जल निकासी और जल हटाने वाले कक्ष (drainage dewatering chamber) का भुगतान कार्य पूर्ण हुए बिना कर दिया गया, जिससे अगस्त 2024 में परियोजना स्थल पर बाढ़ आ गई।
g) उच्च स्तरीय शक्ति समिति (HLPC) को परियोजना में देरी के बावजूद अनुबंधकर्ता को समय विस्तार (EOT) देने के लिए मजबूर किया गया।
h) परियोजना के लिए बिजली खरीद समझौता (PPA) नहीं किया गया, जिससे वित्तीय व्यवस्था करने में कठिनाई हुई।
i) HPPCL ने बिजली टैरिफ ₹4.9 प्रति यूनिट निर्धारित करने की याचिका दायर की, लेकिन HPERC ने इसे अस्वीकार कर ₹2.90 प्रति यूनिट तय किया, जिससे परियोजना की लागत भी नहीं निकल पाएगी।
j) बतौर एमडी, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEBL), हरिकेश मीणा ने SJVNL द्वारा ₹2.42 प्रति यूनिट की दर से दी जा रही बिजली खरीदने की अनुमति नहीं दी, जिससे HPSEBL को करोड़ों का नुकसान हुआ।
k) HPSEBL को खुले बाजार में सस्ती सौर ऊर्जा खरीदने से भी रोका गया, जिससे करोड़ों की हानि हुई।
२. शोंगटोंग करचम जल विद्युत परियोजना (450 मेगावाट) – निर्माणाधीन
अनुमोदित लागत: ₹1,724.10 करोड़
अगस्त 2024 तक व्यय: ₹2,230 करोड़
पूर्णता स्तर: केवल 48-53%
संभावित लागत (दिसंबर 2026 में पूरा होने पर, जो अत्यधिक असंभव है): ₹4,800 करोड़
भ्रष्टाचार के प्रमुख बिंदु:
a) मुख्य ठेकेदार, M/s Patel Engineers को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
b) कंपनी को ₹450 करोड़ का ब्याज मुक्त अग्रिम देने का प्रयास किया गया, जबकि पहले ही ₹1,080 करोड़ का भुगतान हो चुका था, बावजूद इसके कि मात्र 48% काम पूरा हुआ था।
c) आरोप हैं कि उक्त कंपनी के प्रतिनिधि श्री हरिकेश मीणा के जयपुर स्थित निजी घर के निर्माण में सहायता कर रहे थे और उन्हें अन्य राज्यों में महंगे होटलों में ठहराने, पार्टियों और अन्य सुविधाएं देने का कार्य भी कर रहे थे।
d) सोशल मीडिया में पहले भी इस भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें वायरल हुई थीं, लेकिन कोई जाँच नहीं हुई।
e) हरिकेश मीणा द्वारा अपनी मनमानी को वैध बनाने के लिए उच्च स्तरीय शक्ति समितियाँ (HLPCs) बनाई जाती थीं और इन समितियों के अधिकारियों को मनमाने दस्तावेज़ तैयार करने के लिए धमकाया जाता था।
सारांश और मांग
उपर्युक्त घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि HPPCL में श्री हरिकेश मीणा (IAS) और अभियंता देशराज द्वारा व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और दमनकारी प्रशासन किया गया।
इनके द्वारा किए गए अनैतिक कार्यों और मानसिक प्रताड़ना के कारण ईमानदार अधिकारी, अभियंता विमल नेगी को अपनी जान गंवानी पड़ी।
इन दोनों अधिकारियों की भूमिका आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment to suicide) की श्रेणी में आती है।
संविधान के अनुच्छेद 311 के अंतर्गत इनकी तत्काल बर्खास्तगी और कठोर दंड की सिफारिश की जानी चाहिए।
गवाही सत्यापन
मैं, उपरोक्त गवाही के अंतर्गत दिए गए सभी विवरणों को सत्य और प्रमाणिक मानता हूँ। यह जानकारी विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है और इसमें कोई तथ्य छुपाया नहीं गया है।