रिकांग पियो, किन्नौर | विशेषर नेगी ।
आज शाम 5 बजे किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांग पियो की सड़कें न्याय की माँग से गूंजेंगी। स्वर्गीय विमल नेगी को न्याय दिलाने के लिए आयोजित कैंडल मार्च में आम जनता के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह सिर्फ एक मार्च नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है—भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ और उस सिस्टम के खिलाफ जिसने ईमानदार आवाज़ को दबाने की कोशिश की।
विमल नेगी के परिजनों ने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर 15 दिन तक शांतिपूर्वक इंतज़ार किया, लेकिन सरकार की नाकामी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब जनता खुद न्याय की लड़ाई लड़ने को तैयार है।
देशराज को क्यों नहीं पकड़ पाई पुलिस?
जिस देशराज को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली, वह खुलकर शिमला की सड़कों पर घूमता रहा। क्या पुलिस वाकई बेबस थी या फिर सरकार और प्रशासन की मिलीभगत ने उसे बचा लिया? सवाल उठ रहे हैं कि अगर पुलिस स्वतंत्र रूप से काम करती, तो आज न्याय की उम्मीद इतनी धुंधली न होती।
पावर प्रोजेक्ट या भ्रष्टाचार की फैक्ट्री?
शौंग ठग परियोजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि किस तरह ठेकेदार, अफसर और नेता मिलकर सरकारी परियोजनाओं को ‘दूधारू गाय’ बना चुके हैं। परियोजना की लागत आसमान छू रही है, निर्माण कार्य कछुए की चाल चलता है, और अवैध खनन खुलेआम जारी है।
अब जब पटेल इंजीनियरिंग पर दबाव बढ़ा है, तब जाकर थोड़ी हरकत दिखाई दे रही है। लेकिन क्या यह सिर्फ दिखावा है या वास्तव में अब बदलाव आएगा? इसका जवाब वक्त देगा।
आज की शाम, बदलाव की शुरुआत?
आज का कैंडल मार्च केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, यह उस गुस्से का विस्फोट है जो वर्षों से भीतर सुलग रहा था। यह मार्च तय करेगा कि क्या विमल नेगी की ईमानदारी इस सड़े-गले सिस्टम को हिला पाएगी? क्या जनता का यह स्वर सरकार को झकझोर पाएगा?