नई दिल्ली, न्यूज व्यूज पोस्ट।
– भारत सरकार हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के तहत मेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम को लागू कर रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत उन्नत करघे, सौर प्रकाश इकाइयाँ, वर्कशेड, डिज़ाइन और उत्पाद विकास जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।
वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा ने आज राज्यसभा में जानकारी दी कि इस योजना के तहत प्रति क्लस्टर 30 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है, लेकिन इसके लिए अलग से बजट आवंटित नहीं किया गया है। वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक इस योजना के अंतर्गत कुल 3,029.327 लाख रुपये की सहायता दी गई।
हालांकि, आंध्र प्रदेश के प्रकाशम और गुंटूर जिलों में पहचाने गए मेगा हैंडलूम क्लस्टरों को अभी तक कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है। यह जानकारी इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर उठ रहे सवालों को जन्म देती है।
क्या हैं चुनौतियाँ?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना के लिए अलग बजटीय आवंटन न होने से कई क्लस्टरों को समय पर वित्तीय सहायता नहीं मिल पा रही है। स्थानीय बुनकरों को उम्मीद थी कि उन्हें सरकार से अनुदान मिलेगा, लेकिन कई क्षेत्रों में यह सहायता अभी तक नहीं पहुँची है।
भविष्य की संभावनाएँ
सरकार का कहना है कि पूर्ण प्रस्ताव मिलने पर ही वित्तीय सहायता दी जाती है। ऐसे में राज्यों और बुनकर संगठनों को सक्रिय होकर इस योजना का लाभ उठाने के लिए विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
देश के हथकरघा उद्योग को मजबूती देने के लिए इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह हजारों बुनकरों के जीवन में बदलाव ला सकता है।