मंडी जिले की सड़कों पर दौड़ रही इलेक्ट्रिक बसें हिमाचल पथ परिवहन निगम के लिए बचत का जरिया बनने के साथ यात्रियों को भी सफर का नया अनुभव दे रही हैं। 17 अगस्त से 10 सितंबर के बीच मंडी और सुंदरनगर डिपो की 25 इलेक्ट्रिक बसों ने महज 24 दिनों में डीजल बसों की तुलना में निगम को 19 लाख 31 हजार 955 रुपये की बचत कराई है।

इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां ईंधन पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं यात्रियों को भी इनके शांत संचालन और आरामदायक सीटों का अनुभव पसंद आ रहा है। कई यात्रियों ने इन बसों में सफर को सामान्य बसों की तुलना में अधिक सुविधाजनक बताया है।

17 अगस्त को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंडी जिले के लिए 25 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद इन बसों को जिले और बाहरी क्षेत्रों के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर चलाया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक बसें मंडी-शिमला, मंडी-पालमपुर, मंडी-शिमला-तुलाह और मंडी-चंडीगढ़ जैसे लंबे मार्गों के अलावा मंडी-सुंदरनगर, मंडी-बटाहर, मंडी-तांदी, मंडी-पाली, मंडी-रोपा, मंडी-रिवालसर-नैनादेवी, मंडी-कोट, मंडी-कोटली, मंडी-माहन और मंडी-दुर्गापुर सहित विभिन्न मार्गों पर यात्रियों को सेवा दे रही हैं।

मंडी डिपो की 15 इलेक्ट्रिक बसों ने 24 दिनों में कुल 60,060 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान बसों को चार्ज करने पर करीब 7,95,795 रुपये खर्च हुए।

इसी दूरी को यदि डीजल बसों से तय किया जाता तो ईंधन पर करीब 19,30,055 रुपये खर्च होने का अनुमान था। इस तरह इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से मंडी डिपो को 11,34,260 रुपये की बचत हुई।

यह आंकड़ा बताता है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से निगम के परिचालन खर्च को कम करने में मदद मिल रही है। खासकर लंबे समय में ईंधन खर्च में होने वाली बचत निगम के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

सुंदरनगर डिपो की 10 इलेक्ट्रिक बसों ने इसी अवधि में कुल 35,044 किलोमीटर की दूरी तय की। इन बसों को चार्ज करने पर 2,10,037 रुपये खर्च हुए।

इतनी ही दूरी डीजल बसों से तय करने पर करीब 10,07,732 रुपये का ईंधन खर्च आने का अनुमान था। इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से सुंदरनगर डिपो ने 7,97,695 रुपये की बचत की।

मंडी और सुंदरनगर दोनों डिपो के आंकड़ों को जोड़ने पर 24 दिनों में कुल बचत 19,31,955 रुपये रही।

इलेक्ट्रिक बसों की आर्थिक बचत के साथ यात्रियों का अनुभव भी सकारात्मक बताया जा रहा है। मंडी के ज्वालापुर निवासी इंद्र ठाकुर ने मंडी-शिमला मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस से सफर को आरामदायक बताया।

वंशिका जम्वाल ने मंडी-दुर्गापुर मार्ग पर बस की सीटों और सफर की सुविधा को बेहतर बताया। जसवंत कुमार के अनुसार बस में शोर कम होने के कारण यात्रा अधिक सुखद महसूस होती है।

कोटली निवासी किरण राणा ने भी इलेक्ट्रिक बसों को आम यात्रियों के लिए सुविधाजनक परिवहन साधन बताया।

निगम के मंडलीय प्रबंधक उत्तम सिंह के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों की परिचालन लागत कम होने से निगम को आर्थिक लाभ मिल रहा है। इलेक्ट्रिक बसों के सुचारु संचालन के लिए मंडी बस स्टैंड, मंडी कार्यशाला और सुंदरनगर बस स्टैंड में चार्जिंग केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।

इसके अलावा जंजैहली में भी चार्जिंग केंद्र प्रस्तावित है। चार्जिंग ढांचे के विस्तार से आने वाले समय में जिले के अलग-अलग मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मंडी जिले में इलेक्ट्रिक बसों के शुरुआती संचालन से मिले आंकड़ों ने निगम के लिए आर्थिक बचत और यात्रियों के अनुभव, दोनों मोर्चों पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। आने वाले समय में इन बसों का संचालन बढ़ने पर इनके आर्थिक और परिचालन प्रभाव का आकलन और व्यापक स्तर पर किया जा सकेगा।

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