नई दिल्ली/थाईलैंड | न्यूज व्यूज पोस्ट।
बंगाल की खाड़ी से निकलकर सहयोग की लहरें अब नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हैं। थाईलैंड की धरती पर आयोजित 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति ने इस क्षेत्रीय संगठन को नई ऊर्जा दी है। “बिम्सटेक: समृद्ध, लचीला और खुला” विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन में श्री मोदी ने न केवल क्षेत्रीय सहयोग की बात की, बल्कि भारत की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करते हुए कई ठोस पहलों का ऐलान भी किया।
सम्मेलन के प्रारंभ में प्रधानमंत्री ने म्यांमार और थाईलैंड में आए हालिया विनाशकारी भूकंप पर गहरा शोक प्रकट किया। उन्होंने मानवता के पक्ष में खड़े रहने की भारत की परंपरा को दोहराते हुए कहा कि संकट की घड़ी में बिम्सटेक एकजुटता का प्रतीक बन सकता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच “सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक सेतु” बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच अब केवल विचार-विमर्श का नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजनाओं का केंद्र बन रहा है।
भारत द्वारा शुरू की गई नई पहलों में बिम्सटेक देशों के लिए संस्थागत विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि आज की वैश्विक अनिश्चितताओं में बिम्सटेक क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री शिनावात्रा की भूमिका की सराहना करते हुए श्री मोदी ने बिम्सटेक को ‘आशाओं का संगठन’ करार दिया—जहाँ समन्वय, सहयोग और साझा विकास की भावना सर्वोपरि है।