हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा के कार्डियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुल कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार एवं अन्य प्रतिवादियों को निर्देश जारी किए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी विभागीय जांच के संबंध में कोई भी सार्वजनिक बयानबाजी न की जाए, जिससे जांच प्रक्रिया बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्ष रूप से पूरी हो सके। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता डॉ. मुकुल के खिलाफ टांडा में सेवाकाल के दौरान बड़ी मात्रा में स्टेंट (हृदय संबंधी उपकरण) रखने के आरोपों पर विभागीय जांच चल रही है।
हालांकि, ये आरोप अभी कानून के तहत साबित नहीं हुए हैं लेकिन प्रतिवादी डॉ. आरपी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज टांडा के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा और कार्डियोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर (मनोनीत) डॉ. अंबुधर शर्मा की ओर से मीडिया में गलत व भ्रामक बयानबाजी की जा रही है, जिससे याचिकाकर्ता की सामाजिक व पेशेवर छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने प्रतिवादियों से अलग से जवाब मांगे बिना ही याचिका का निपटारा कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड से यह जाहिर है कि आरोपों पर जांच अभी लंबित है। ऐसे में मामले के गुणों-दोषों पर टिप्पणी किए बिना अदालत ने आदेश दिया कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह से बचने के लिए अधिकारी इस विषय पर मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर कोई टिप्पणी न करें।
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