जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह से चंबा होते हुए अब श्रद्धालुओं का जत्था उपमंडल भरमौर पहुंचा है। माता भरमाणी के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु भरमौर हेलीपैड में दो दिन तक डेरा लगाने के बाद जन्माष्टमी पर पवित्र डल में डुबकी लगाएंगे।

वर्षों से चली आ रही पुरानी परंपरा के अनुसार भद्रवाह और डोडा से मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालु पहला डेरा चंबा में लगाते हैं। यहां पर विधि-विधान से अपने देव चिह्न चौगान में स्थापित करने के बाद मुख्यालय में स्थित मंदिरों के दर्शन करने के बाद भरमौर के लिए कूच करते हैं।

इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भद्रवाह से पहुंचा श्रद्धालुओं का जत्था भरमौर उपमंडल पहुंचा। शुक्रवार सुबह वाहनों और पैदल 100 लोगों का जत्था भद्रवाह से भरमौर पहुंचा। हेलीपैड में अपने देव चिह्न स्थापित करने के बाद श्रद्धालु माता भरमाणी के दर्शनों को पहुंचे। जहां से पैदल फिर से हेलीपैड में उन्होंने डेरा जमाया।

श्रद्धालुओं में शामिल विनय कुमार, राजीव कुमार, शेखर, सूरज ने बताया कि यह जत्था जन्माष्टमी पर्व पर डलझील में डुबकी लगाएगा। कहा कि पिछले साल आपदा के कारण हजारों शिव भक्त मणिमहेश यात्रा नहीं कर पाए थे।

भद्रवाह और डोडा से आए जत्थों को भी चंबा से लौटना पड़ा था। लेकिन, इस बार श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। भगवान शंकर के पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन करने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिए श्रद्धालु पिछले साल की तुलना में अधिक संख्या में यात्रा पर जाएंगे।

 

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