राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने केलांग की विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से दायर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन रिपोर्ट पर जवाब मांगा है। एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि 8 अक्तूबर 2024 के बाद कोकसर, मनाली, सोलंग वैली और आसपास के पहाड़ी इलाकों की  कैरिंग कैपेसिटी (वहां लोगों और गतिविधियों का भार सहने की क्षमता) तय करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दे। कोर्ट पर्यावरण संगठन फ्रेंड्स की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह निर्देश 7 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान दिए गए।

याचिकाकर्ता ने हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) शिमला के एक पत्र का उल्लेख किया। यह पत्र 8 अक्तूबर 2024 को हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजा गया था। पत्र में राज्य से कोकसर और आसपास के पहाड़ी स्थलों, जिनमें मनाली और सोलंग घाटी शामिल हैं, की वहन क्षमता निर्धारित करने का निर्णय लेने का अनुरोध किया गया था। अधिकरण ने संबंधित प्रतिवादी को छह सप्ताह के भीतर इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से लिए गए किसी भी निर्णय को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। साडा की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क किनारे और बीआरओ परिसर के पास से कचरा हटा दिया गया है।

वहीं केलांग की विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने 3 अक्तूबर 2026 को अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में सड़क किनारे कूड़ा-कचरा हटाने और बीआरओ परिसर के पास से अपशिष्ट हटाने का काम पूरा होने की जानकारी दी गई। शाकास नाले और बिलिंग नाले से पुराने कचरे को भी हटा दिया गया है। चार पंचायतों में घर-घर कचरा संग्रहण शुरू हो गया है और इसके विस्तार की योजना है। दलांग में गीले कचरा प्रबंधन केंद्र का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है, जिसे नवंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य है। उपनियमों का मसौदा निदेशक टीसीपी को भेजा गया है और सरकारी मंजूरी के बाद अधिसूचना का इंतजार है। बिलिंग और कोकसर में एमआरएफ सुविधाएं पूरी तरह से चालू हैं और ठोस व सूखे कचरे का प्रबंधन कर रही हैं।  रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट की ओर से छह सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी, 2027 को होगी।

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