शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में ओलावृष्टि से बचाव के लिए इस्तेमाल की जा रही एंटी-हेल गनों के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध सरकारी के साथ-साथ निजी एंटी-हेल गनों पर भी लागू रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चन्द्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने राज्य सरकार से यह रिपोर्ट मांगी है कि एंटी-हेल गन बंद होने के बाद देवरीघाट और बड़ौनघाट सहित आसपास के क्षेत्रों में क्या प्रभाव पड़ा।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि एक घंटे से अधिक समय तक हेल कंट्रोल सिस्टम चलाए जाने के दौरान भारी बारिश हुई थी। कोर्ट ने इसके मद्देनजर एंटी-हेल गन से संभावित नुकसान की आशंका को गंभीरता से लिया।
मामले में डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। विश्वविद्यालय को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।
