
ढालपुर में देवता व्यास ऋषि के अस्थायी शिविर मे देवत के साथ बैठे मुख्य कारकून।
– फोटो : संवाद
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ढालपुर में देवता व्यास ऋषि के अस्थायी शिविर मे देवत के साथ बैठे मुख्य कारकून।
– फोटो : संवाद
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं की मौजूदगी के बीच देव परंपराओं का निर्वहन करने वाले कारकूनों की जीवनशैली भी अनूठी है। उत्सव के सात दिन तक देवताओं के मुख्य कारकून तपस्वियों की तरह रहते हैं। देव नियमों में बंधे इन कारकूनों को अपने आराध्य के अस्थायी शिविर में रहकर चाकरी करनी पड़ती है। उनके खानपान से लेकर रहने तक के नियम निर्धारित होते हैं। वे शिविर में बना भोजन ही खाते हैं और परंपरा के अनुसार बाहर होटल-ढाबों में चाय-पानी तक से परहेज करते हैं।
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