
नरसिंह पहली जलेब।
– फोटो : संवाद
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नरसिंह पहली जलेब।
– फोटो : संवाद
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दूसरे दिन महाराजा कोठी के आराध्य देवता नरसिंह की पहली जलेब में विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं ने भाग लिया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर देवलुओं के साथ देवी-देवताओं के नगर भ्रमण से ढालपुर का माहौल भक्तिमय हो गया। जलेब के दौरान कुल्लू की प्राचीन देव परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। जलेब में पीज के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, जोंगा के गौरी देवता और हुरगू नारायण, लोट के देवता वीर कैला, कमांद के वीर कैला, पीज के अजयपाल तथा खल्याणी के पांचवीर बराधी सहित अन्य देवी-देवताओं ने भाग लिया। जलेब के दौरान जगह-जगह देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह को देवताओं की ओर से आशीर्वाद स्वरूप फूल भेंट किए गए। कुल्लू दशहरा उत्सव में जलेब का विशेष धार्मिक महत्व है। देव परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं की उपस्थिति में भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह नरसिंह पारंपरिक परिधानों में की पालकी में सवार होते हैं, जबकि आगे-आगे नरसिंह की घोड़ी चलती है। इस परंपरा के माध्यम से मेले की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना की जाती है।
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