भूतपूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड की बैठक में अग्निवीर भर्ती योजना को बंद करने का मुद्दा जोर-शोर से उठा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वह इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। पूर्व सैनिकों ने इस योजना को युवाओं के भविष्य के लिए असुरक्षित बताया। राज्य सचिवालय में मंगलवार को बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि अग्निवीर योजना से हिमाचल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना और हमीरपुर जिलों की अर्थव्यवस्था पर इसके असर का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने सेना में नियमित भर्ती का समर्थन किया और भर्ती कोटे में कमी पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि चार परमवीर चक्र जीतने वाले हिमाचल के वीर जवानों के साथ यह योजना अन्याय है। कुल्लू के पूर्व सैनिक शिवदयाल सिंह ने कहा कि चार साल बाद युवाओं को पेंशन या अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्होंने जोर दिया कि यह योजना युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं करती। मुख्यमंत्री ने युवाओं को रोजगार देने के लिए पुलिस में 1,300 पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में 1,000 और पद भरे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की 80 फीसदी से अधिक आबादी गांवों में रहती है। राज्य की आर्थिकी का मुख्य आधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था है। सरकार इसे मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। सैनिक कल्याण मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल ने हिमाचल को सैनिक बहुल राज्य बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक राज्य की धरोहर हैं। पूर्व सैनिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सरल और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।