हिमाचल प्रदेश में मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी योजना लागू होने के बाद भी पुरानी मनरेगा की देनदारियां पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई हैं। प्रदेश में लेबर, मैटीरियल और स्किल्ड मजदूरों के भुगतान की बड़ी राशि अटकने से पंचायत स्तर पर काम करने वाले लोगों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2027 तक 12,642.27 लाख रुपये का भुगतान लंबित पड़ा है, जबकि वर्ष 2025-26 और 2026-27 का 12386.53 लाख रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। जबकि इससे पहले के वित्तीय वर्षों का भी लाखों रुपये में भुगतान होना अभी लंबित पड़ा हुआ है। मनरेगा के तहत किए गए विभिन्न विकास कार्यों की मजदूरी और सामग्री की राशि का भुगतान केंद्र से धनराशि जारी नहीं होने के कारण प्रभावित हुआ है।
लंबित राशि में लेबर के साथ-साथ मैटीरियल और स्किल्ड मजदूरों का भुगतान भी शामिल है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों के अलावा उन लोगों की परेशानी भी बढ़ी है, जिन्होंने पंचायतों के विकास कार्यों के लिए सामग्री उपलब्ध करवाई है। वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि नई योजना शुरू होने के बाद मनरेगा के तहत पहले से लंबित भुगतान कब तक जारी होगा।
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