कभी चरस की खेती और तस्करी तक सीमित रही समस्या अब चिट्टे, इंजेक्शन, एमडीएमए और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के रूप में युवाओं की नसों तक पहुंच रही है। हालात यह है कि प्रदेश धीरे- धीरे नशे के ट्रांजिट कॉरिडोर से आगे बढ़कर इसके उपभोक्ता राज्य का स्वरूप लेने लगा है।

चिट्टा-चरस व गांजा की खपत राष्ट्रीय औसत से ज्यादा।
– फोटो : अमर उजाला
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