hp High Court on benefit of jobs obtained on compassionate grounds

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय।
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलने के साथ ही संबंधित परिवार का संकट काल समाप्त माना जाता है। ऐसे में कर्मचारी को सामान्य कर्मियों की तरह ही अपने कॅरिअर में आगे बढ़ना होगा, उसे किसी विशेष दर्जे या असीमित करुणा का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति नियमित भर्ती का जरिया नहीं, बल्कि परिवार को अचानक आए वित्तीय संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सीमित राहत मात्र है। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने यह व्यवस्था पुलिस विभाग में अनुबंध पर तैनात क्लर्क जनक दुलारी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दी। अदालत ने कहा कि एक बार बिना किसी विरोध के पद स्वीकार कर लेने के बाद कर्मचारी को अपनी मर्जी से पद की स्थिति या सेवा शर्तों को अनुबंध से नियमित में बदलवाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाता।


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