Bofors Gun Selection and Defence Deal Controversy

प्रोबल दासगुप्ता/खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के समापन अवसर पर मौजूद लोग व अन्य।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

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पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी और लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि जनरल सुंदरजी ने बोफोर्स तोप को भारतीय सेना के लिए उपयुक्त माना था। उनका स्पष्ट कहना था कि तोप अच्छी थी, लेकिन सौदे में गड़बड़ी थी। दासगुप्ता के अनुसार पूरी जांच प्रक्रिया के बाद जनरल सुंदरजी इस मामले में बेदाग पाए गए। सुंदरजी ने रक्षा सचिव एसके भटनागर को नोट भेजकर बोफोर्स सौदे में कथित तौर पर किकबैक (गुप्त रूप से कमीशन) प्राप्त करने वालों के नाम बताने की मांग की थी।




सरकार ने ये नाम नहीं बताए, जिसके बाद तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री मंत्री अरुण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। बोफोर्स तोपों की तलाश 1981 में शुरू हुई थी। इस दौरान चार तोपों की पहचान की गई थी, जिनमें ऑस्ट्रियाई, फ्रांसीसी सोफमा, बोफोर्स और एक ब्रिटिश तोप शामिल थीं। अन्य तोपों के मानदंडों पर खरा न उतरने के बाद बोफोर्स विकल्प के रूप में उभरी।

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