हिमाचल प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल स्रोतों के संरक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी अब ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां (वीडब्ल्यूएससी) संभालेंगी। पंचायती राज विभाग ने जल शक्ति विभाग के आग्रह पर अधिसूचना जारी कर मौजूदा समिति को ग्राम पंचायत स्रोत संवर्धन समिति (एसएससी) के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत अलग समिति बनाने के बजाय मौजूदा समिति ही ये दायित्व निभाएगी। मंगलवार को इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई।
पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के तहत उठाए गए इस कदम का उद्देश्य पेयजल स्रोतों का नियमित आकलन और सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पानी की उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखना है। समिति को पंचायत क्षेत्र के पेयजल स्रोतों का रिकॉर्ड और रजिस्टर तैयार रखने के साथ ही डिजिटल निगरानी के लिए आवश्यक आंकड़े भी उपलब्ध कराने होंगे। इसके अलावा, पेयजल स्रोतों की सुरक्षा और रखरखाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी समिति की होगी। पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशालाओं और फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से किए जाने वाले परीक्षणों में सहयोग करना होगा। किसी स्रोत के सूखने, पानी मटमैला होने, रिसाव या गुणवत्ता संबंधी समस्या सामने आने पर संबंधित उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना देनी होगी।
ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट तैयार करने और ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) बनाने में भी समिति सहयोग करेगी। साथ ही, छोटे स्तर पर जल पुनर्भरण और स्रोत संरक्षण से जुड़े कार्यों की निगरानी करेगी। इसके लिए वीबी-जी राम जी, डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 और अन्य योजनाओं के साथ समन्वय कर संरक्षण कार्यों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में मदद करनी होगी। जल शक्ति विभाग समिति को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगा। अधिसूचना की प्रतियां सभी जिला उपायुक्तों, मुख्य अभियंताओं, जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं।
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