रिकांग पिओ, विशेषर नेगी।
किन्नौर जिले के मीरू क्षेत्र में रोरा स्टेज-2 परियोजना से जुड़े दो स्टोन क्रशर प्लांट को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सीज किए जाने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों क्रशरों पर आवश्यक मंजूरी के बिना संचालन करने और निरीक्षण के दौरान पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपकरण उपलब्ध नहीं पाए जाने के आरोप हैं।
स्टोन क्रशर से निकलने वाली धूल आसपास के वातावरण, वायु गुणवत्ता और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में क्रशर इकाइयों का निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालन करना आवश्यक है।
बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान संबंधित इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था से जुड़ी कमियां पाई गईं। इसके बाद बोर्ड ने कार्रवाई करते हुए दोनों प्लांट सीज कर दिए। हालांकि, कार्रवाई की तारीख, निरीक्षण रिपोर्ट, संबंधित इकाइयों के नाम और मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों का विस्तृत विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना बाकी है।
इस कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित परियोजना प्रबंधन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का अनुपालन करने के लिए क्या कदम उठाता है और आवश्यक मंजूरियों एवं प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं को पूरा करने के बाद संचालन की अनुमति मिलती है या नहीं।
पर्यावरणीय नियमों का पालन जरूरी
पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण एवं जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी गतिविधियों के दौरान धूल और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों को नियंत्रित करना विशेष महत्व रखता है। स्टोन क्रशर में धूल को दबाने के लिए पानी का छिड़काव, सामग्री को ढकने तथा अन्य निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण उपायों की आवश्यकता हो सकती है। संबंधित इकाइयों में इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति निरीक्षण रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कार्रवाई का मुख्य कारण अनिवार्य मंजूरी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों से जुड़ी कथित कमियां हैं। मामले में बोर्ड का आधिकारिक पक्ष और परियोजना प्रबंधन की प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
रामपुर बुशहर | विशेषर नेगी | News View Post
