चंडीगढ़ में हिमाचल की इलेक्ट्रिक को रोकना सीटीयू को उस समय भारी पड़ गया, जब ऊना डिपो ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सीटीयू की बसों को आईएसबीटी ऊना में प्रवेश देने से रोक दिया। चंडीगढ़ आईएसबीटी में ऊना से गई इलेक्ट्रिक को सीटीयू ने परमिट का हवाला देकर रोक दिया था। ऊना डिपो प्रबंधन ने मामले को सुलझाने के लिए सीटीयू अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन फोन तक नहीं उठाया गया। इसके बाद ऊना डिपो ने भी सीटीयू की बसों की एंट्री रोक दी। दबाव बढ़ते ही सीटीयू प्रबंधन ने हिमाचल की इलेक्ट्रिक बसों के चंडीगढ़ आईएसबीटी में प्रवेश पर लगाई रोक हटा दी। ऊना डिपो के डीडीएम ने स्पष्ट किया कि निगम ने इलेक्ट्रिक बसों को परमिट के आधार पर ही चंडीगढ़ भेजा था। ऐसे में बस को आईएसबीटी में रोकना सीटीयू की कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।


ऊना डिपो ने भी साफ कर दिया कि यदि हिमाचल की बसों को चंडीगढ़ में रोका जाएगा तो सीटीयू की बसों को ऊना में भी खुली छूट नहीं दी जा सकती। इस घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल इलेक्ट्रिक बसों के परमिट को लेकर है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को परमिट की शर्त से बाहर रखा है। ऐसे में चंडीगढ़ आईएसबीटी में हिमाचल की इलेक्ट्रिक बस को परमिट के नाम पर रोकने की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऊना डिपो प्रबंधन का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसें निर्धारित अनुमति के तहत ही चंडीगढ़ भेजी गई थीं। ऐसे में चंडीगढ़ में बस रोकने के बजाय सीटीयू को हिमाचल परिवहन निगम से बातचीत करनी चाहिए थी। ऊना डिपो की जवाबी कार्रवाई के बाद फिलहाल मामला शांत हो गया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने अंतरराज्यीय रूटों पर ई बसों के संचालन को लेकर नियमों की स्पष्टता की जरूरत जरूर सामने ला दी है।  एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक पंकज सिंघल ने बताया कि परिवहन निगम की इलेक्ट्रिक बस को रोका गया है। सीटीयू प्रबंधन से सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।


हमारी इलेक्ट्रिक बसें गलत तरीके से रोकी गई हैं। इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं है। इसे लेकर केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी हुई है। – राजेश जोशी, डीडीएम, एचआरटीसी ऊना।


 

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