संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh

Updated Thu, 01 Oct 2026 05:15 AM IST

प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश कृषि विवि पालमपुर की ओर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय बकाया का भुगतान न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। वहीं राज्य सरकार की वर्ष 2023–24 आबकारी नीति के प्रावधानों को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है।  जानिए अदालत के बड़े फैसले

Major Himachal High Court Ruling: Registrar to Appear in Court if Leave Encashment Not Paid Within Four Weeks

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश कृषि विवि पालमपुर की ओर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय बकाया का भुगतान न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि विवि आगामी चार हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता को लीव एन्कैशमेंट की राशि जारी नहीं करता है, तो विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को अगली सुनवाई पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने यह आदेश डॉ. राजेश उप्पल की ओर से दायर एक निष्पादन याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया। विवि के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स सभा ने अपने बकाया लीव इनकैशमेंट को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले 23 जुलाई 2025 को न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने एक अन्य मामले (कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स सभा बनाम विवि) में फैसला सुनाते हुए कहा था कि फंड्स की कमी या खराब वित्तीय स्थिति का बहाना बनाकर कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों को नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पेंशन और सेवानिवृत्ति के लाभ कोई खैरात या इनाम नहीं हैं, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान से जीने के अधिकार का हिस्सा हैं।


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