हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि दो अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, काम का स्वरूप और जिम्मेदारियां एक जैसी हैं तो केवल विभाग अलग होने के आधार पर उन्हें कम वेतन नहीं दिया जा सकता। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन केवल एक नारा नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के तहत एक सांविधानिक लक्ष्य है। सरकार की इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया कि वेतनमान तय करना सिर्फ कार्यपालिका का काम है। कोर्ट ने कहा कि जब अलग-अलग विभागों में समान योग्यता और काम के बावजूद कर्मचारियों के साथ तर्कहीन या भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है तो अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती और उसे दखल देने का पूरा अधिकार है।
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