हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मानसून के दौरान भारी बारिश, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं की चेतावनी अब पहले से अधिक सटीक हो सकेगी। मौसम मॉडल में जमीन की वास्तविक स्थिति का हाई रिजॉल्यूशन डेटा शामिल करने से बारिश के समय, स्थान और तीव्रता का बेहतर पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भुवनेश्वर और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिकों की स्टडी में यह सामने आया है। मौसम मॉडल में जमीन की नमी, तापमान और भूमि उपयोग-भूमि आवरण (एलयूएलसी) की वास्तविक जानकारी शामिल करने से भारी बारिश के पूर्वानुमान में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। हाई रिजॉल्यूशन लैंड डेटा असिमिलेशन सिस्टम (एचआरएलडीएएस) और इसरो के अद्यतन एलयूएलसी डेटा से लैस मॉडल में भारी वर्षा के पूर्वानुमान की औसत त्रुटि 40 प्रतिशत से अधिक से घटकर करीब 32 प्रतिशत रह गई।


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