बड़े स्तर पर ठोस कचरा पैदा करने वाले प्रतिष्ठानों यानी बल्क वेस्ट जनरेटरों ने नियमों का पालन नहीं किया तो उनकी बिजली और पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से काटे जाएंगे। पहले स्थानीय निकाय की ओर से लिखित नोटिस दिया जाएगा। फिर जिला उपायुक्त की विशेष सेल कार्रवाई कर सकेगी। जिला उपायुक्तों को स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर छह सप्ताह के भीतर बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद संबंधित स्थानीय निकाय इन सभी संस्थानों को लिखित नोटिस जारी करेंगे।
हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एक अप्रैल से लागू हो चुके हैं। नियम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ वाणिज्यिक, संस्थागत और सरकारी प्रतिष्ठानों पर भी लागू होंगे। नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है। इनमें गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है।
गीले कचरे में रसोई, खाद्य और अन्य जैव-अवक्रमणीय कचरा, जबकि सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी पुनर्चक्रण योग्य सामग्री शामिल होगी। सेनेटरी कचरे में इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी टॉवल पैड आदि तथा विशेष देखभाल वाले कचरे में सीएफएल बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब, एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे, इस्तेमाल की गई सीरिंज, टूटे पारे वाले थर्मामीटर और बैटरियां शामिल हैं। सेनेटरी कचरे को निर्माताओं या ब्रांड की ओर से उपलब्ध कराए गए पाउच अथवा रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटकर निर्धारित स्थान पर सौंपना होगा। कचरा जलाना, जमीन में दबाना, खुले में फेंकना अथवा नालियों, जलस्रोतों और सार्वजनिक स्थानों पर डालना प्रतिबंधित है।
Source: Read original article
