हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बडोग क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर गंभीर रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने धारा-118 में गैर-हिमाचली बिल्डरों को भूमि आवंटन पर सवाल खड़े किए हैं। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि निर्माण करने वाले अधिकांश बिल्डर चंडीगढ़, जिरकपुर, मोहाली, अमृतसर, नोएडा और दिल्ली के हैं। कोर्ट ने पूछा कि हिमाचल प्रदेश काश्तकारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा-118 के तहत गैर हिमाचली बिल्डरों को किस आधार पर अनुमतियां दी गईं। कोर्ट ने पिछले 10 वर्षों में सोलन बड़ोग, नाहन और शिमला में धारा-118 में दी गई सभी अनुमतियों का ब्योरा तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की पीठ ने कुसुम बली मामले में सुनवाई करते हुए वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी। खंडपीठ ने बड़ोग में 155 पेड़ काटने और अवैध निर्माण पर सरकार और वन विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि वन और अन्य संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। यदि निष्पक्ष और नई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो मामले की जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाएगी।

14 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 21 बिल्डरों, व्यक्तियों को भवन निर्माण की मंजूरी दी गई, इनमें से कई ने छह मंजिला से अधिक का निर्माण कर लिया है। कोर्ट की ओर से 11 मई, 10 जुलाई और 25 अगस्त को आदेश जारी करने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया। वन विभाग की समिति रिपोर्ट के अनुसार, बड़ोग क्षेत्र में 50,058 वर्ग मीटर क्षेत्र में 155 पेड़ काटे गए हैं। इसमें मुख्य रूप से तीन बिल्डर संलिप्त पाए गए हैं। निजी भूमि (50,058 वर्ग मीटर) पर 155 पेड़ काटने में मुख्य रूप से एसएसआरएन इंफ्राकॉन, बारोग रिसॉर्ट्स और एमएमएम इंफ्रा शामिल हैं।

वन विभाग की ओर से इसे मामूली नुकसान बताने वाली रिपोर्ट को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने वन विभाग की इस दलील को खारिज कर दिया कि पेड़ निजी भूमि पर काटे गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश भूमि संरक्षण अधिनियम, 1978 के तहत निजी भूमि पर भी पेड़ काटने की सीमा तय है। केवल एक व्यक्ति पर 10,800 का नुकसान चालान ठोक कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया। निर्माण गतिविधियों के कारण स्थानीय जलधाराओं के प्रवाह में बाधा और अनियंत्रित बोरवेल खुदाई पर गंभीर चिंता जताई गई।

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