किशाऊ बांध परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर लिए गए हैं। इस परियोजना के बनने से प्रदेश को आर्थिक लाभ होगा, लोगें के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे, लेकिन इसकी झील में पीढ़ियों की कहानी भी डूब जाएगी। कल तक जिन पहाड़ों को अपना घर समझकर ग्रामीण सुकून की सांस लेते थे, अब उन्हीं पहाड़ों पर विस्थापन का साया मंडराने लगा है। जिस आंगन में दादा-पड़दादा की पीढ़ियां पलीं, जिस खेत की मिट्टी में पूर्वजों के पसीने की खुशबू बसी है, जिस पगडंडी पर बचपन से कदम पड़े और जिन देवस्थलों पर पीढ़ियों से माथा टेकते आए हैं, अब वही सब टौंस नदी पर बनने वाली किशाऊ बांध परियोजना की झील में समाने की आशंका है। परियोजना को निर्माण की हरी झंडी मिलने के बाद शिलाई उपमंडल के चामड़ा-मोहराड़ और कुंवानू क्षेत्र के परिवारों में विकास की उम्मीद के साथ मातृभूमि से बिछड़ने का दर्द भी गहरा गया है।
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