बिजली की लाइनों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने बड़ा बदलाव किया है। अब हाई और मीडियम वोल्टेज लाइनों पर मरम्मत या रखरखाव के लिए कागजी परमिट नहीं चलेगा। शटडाउन लेने से लेकर काम पूरा होने और बिजली दोबारा चालू करने तक पूरी प्रक्रिया मोबाइल एप के जरिये होगी। बोर्ड ने कनेक्ट एप शुरू किया है। पहले चरण में इसे शिमला शहर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है। 30 सितंबर 2026 तक इसका परीक्षण किया जाएगा। व्यवस्था सफल रही तो प्रदेश के सभी फील्ड सब-डिवीजनों और विद्युत मंडलों में इसे अनिवार्य किया जाएगा।
नई व्यवस्था में कनिष्ठ अभियंता को परमिट टू वर्क (पीटीडब्ल्यू) के लिए फीडर और कार्यस्थल की जानकारी के साथ मौके की जियो-टैग्ड फोटो एप पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद सब-स्टेशन अटेंडेंट लाइन के आइसोलेशन, ग्राउंडिंग और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करेगा। सब कुछ सही मिलने पर ही डिजिटल परमिट जारी होगा। बोर्ड ने बिजली बहाली की प्रक्रिया में भी सुरक्षा की दूसरी दीवार खड़ी की है। काम पूरा होने के बाद कर्मचारी साइट खाली करने, उपकरण हटाने और अर्थिंग निकालने की पुष्टि करेंगे। इसके बाद जेई के मोबाइल पर छह अंकों का सिक्योरिटी कोड आएगा।
जब तक यह कोड सब-स्टेशन अटेंडेंट को देकर सिस्टम में सत्यापित नहीं किया जाएगा, तब तक लाइन में दोबारा बिजली नहीं छोड़ी जा सकेगी। इससे मरम्मत के दौरान गलती से बिजली बहाल होने या किसी कर्मचारी के लाइन पर काम करते समय करंट आने की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी। फील्ड कर्मचारियों के साथ बढ़ रहे हादसों पर लगाम लगाने को बोर्ड प्रबंधन ने यह फैसला लेते हुए नई व्यवस्था शुरू की है।
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