सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों को महीनों तक फाइलों में दबाकर रखने वाले विभागों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने वीआईपी संदर्भों के निपटारे में देरी पर लगाम कसने के लिए वीआईपी लेटर मैनेजमेंट सिस्टम (वीएलएमएस) लागू कर दिया है।

इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए हर मामले की निगरानी सीधे पीएमओ स्तर तक होगी और विभागों को समयबद्ध जवाब देना अनिवार्य होगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी इस प्रणाली को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। 

  सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, मंडलायुक्तों और बोर्ड-निगमों को पीएम-आरईएफ पोर्टल के माध्यम से वीआईपी मामलों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग करने को कहा गया है।  प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। अब तक जनप्रतिनिधियों के पत्र विभिन्न स्तरों पर लंबित रहते थे और उनकी स्थिति जानना आसान नहीं होता था। नई व्यवस्था में हर संदर्भ को एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। 

 संबंधित विभाग को कार्रवाई रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी और किसी भी देरी की स्थिति में सिस्टम स्वतः रिमाइंडर और अलर्ट जारी करेगा। इससे फाइलों की गति बढ़ने और जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। इस नई व्यवस्था के बाद सांसदों और विधायकों की ओर से उठाए गए जनहित के मामलों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। हर मामले की प्रगति पीएमओ के रिकॉर्ड में दर्ज होगी, जिससे अधिकारियों पर समय पर कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा। 

उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त सचिव सुभाषीश पांडा की ओर से मुख्य सचिव केके पंत को भेजे गए पत्र के आधार पर हिमाचल में यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से प्रभावी कर दी गई है।

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