बाल झड़ने और गंजेपन की बढ़ती समस्या को लेकर हिमाचल प्रदेश से चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एक हेल्थ टेक संस्था की ओर से किए गए सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र के बाद हिमाचल प्रदेश देश में बाल झड़ने की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। सर्वे में प्रदेश के 52.7 प्रतिशत लोगों में स्टेज-3 हेयर लॉस की समस्या सामने आने का दावा किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए भी बाल झड़ने की बढ़ती समस्या चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव, खानपान में बदलाव और पानी में चूने या अन्य मिनरल्स की अधिक मात्रा बालों की सेहत पर असर डाल रही है। हेल्थ टेक संस्था ने प्रदेश में करीब पांच लाख लोगों पर सर्वे किया है।
सर्वे के अध्ययन के अनुसार 42.4 प्रतिशत लोग स्टेज-1 और 35.8 प्रतिशत लोग स्टेज-2 बाल झड़ने की समस्या से प्रभावित हैं। इनमें शिमला, सोलन, कांगड़ा, मंडी और ऊना जिले के लोग अधिक प्रभावित बताए गए हैं। पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या का स्तर ज्यादा है, जबकि महिलाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार शिमला, सोलन और अन्य उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में नमी अधिक होने के कारण बाल देर से सूखते हैं। इससे बालों में रूखापन और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं, हिमाचल के कई मैदानी और निचले क्षेत्रों में पानी में चूने या मिनरल्स की मात्रा अधिक होने से भी बालों के रूखे होने की शिकायत सामने आ रही है।
बदलते खानपान को भी बाल झड़ने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। लोगों में जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का चलन बढ़ने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एमिनो एसिड, आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी का असर बालों की जड़ों पर पड़ सकता है। इसके अलावा बढ़ता प्रदूषण और पेड़ों के लगातार कटान से पर्यावरण में हो रहे बदलाव भी समस्या को बढ़ा रहे हैं।
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