कल्पना कीजिए कि आप किसी कृष्ण मंदिर में जाएं और वहां कान्हा के साथ राधा की जगह मीरा बाई की प्रतिमा देखकर ठिठक जाएं। पहली नजर में यही सवाल मन में उठेगा-आखिर ऐसा क्यों? हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर में स्थित श्री बृजराज स्वामी मंदिर इसी सवाल का जवाब अपने भीतर समेटे हुए है। नूरपुर किले के परिसर में स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और उनकी अनन्य भक्त मीरा बाई के अनूठे संबंध का प्रतीक माना जाता है। यहां कृष्ण के साथ मीरा की प्रतिमा स्थापित है, जो मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है।
रात में सुनाई दिए घुंघरू और संगीत, फिर बदल गई मंदिर की कहानी
मंदिर की स्थापना से जुड़ी कथा नूरपुर के राजा जगत सिंह और चित्तौड़गढ़ से जुड़ती है। मान्यता के अनुसार राजा जगत सिंह चित्तौड़गढ़ गए थे। वहां रात्रि विश्राम के दौरान उन्हें एक मंदिर की दिशा से संगीत और घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी।
जिज्ञासा हुई तो उन्होंने मंदिर की ओर देखा। वहां एक महिला भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने भजन गाते हुए नृत्य कर रही थी। वह कृष्ण के प्रति पूरी तरह समर्पित नजर आ रही थी। इस दृश्य ने राजा को गहराई से प्रभावित किया। राजा ने जब इस घटना की चर्चा अपने राजपुरोहित से की तो उन्हें सलाह दी गई कि चित्तौड़गढ़ में मौजूद श्रीकृष्ण और मीरा की प्रतिमाओं को नूरपुर लाने का प्रयास किया जाए।
चित्तौड़गढ़ से नूरपुर आईं कृष्ण और मीरा की प्रतिमाएं
कथा के अनुसार राजा जगत सिंह ने चित्तौड़गढ़ के राजा के सामने इन प्रतिमाओं को नूरपुर ले जाने की इच्छा रखी। उन्हें श्रीकृष्ण और मीरा की प्रतिमाएं भेंट में मिलीं। इनके साथ मौलश्री का पौधा भी दिए जाने का उल्लेख मिलता है। नूरपुर लौटने के बाद राजा जगत सिंह ने अपने दरबार-ए-खास को ही मंदिर का स्वरूप दे दिया और वहां दोनों प्रतिमाओं की स्थापना करवाई। यही स्थान आगे चलकर श्री बृजराज स्वामी मंदिर के रूप में आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
कृष्ण के साथ मीरा… यही है मंदिर की सबसे बड़ी पहचान
आमतौर पर कृष्ण मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा की प्रतिमा दिखाई देती है। नूरपुर का बृजराज स्वामी मंदिर इस परंपरागत दृश्य से अलग है। यहां भक्तों को कृष्ण के साथ मीरा के दर्शन होते हैं। इसीलिए मंदिर को कृष्ण भक्ति और मीरा की अनन्य साधना के अनोखे संगम के रूप में देखा जाता है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा काले संगमरमर की और मीरा बाई की प्रतिमा अष्टधातु की बताई जाती है। प्रतिमाओं के साथ मंदिर की दीवारों पर कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से जुड़े चित्र भी इसकी सुंदरता बढ़ाते हैं।
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