भारत में वक्फ संपत्तियों का दायरा काफी बड़ा है। भारतीय वक्फ संपत्ति प्रबंधन प्रणाली (वामसी) पोर्टल के अनुसार, देश में कुल 37.39 लाख एकड़ से अधिक वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। 32 राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित वक्फ बोर्ड इनका प्रबंधन करते हैं। कुल 8,72,802 वक्फ संपत्तियों में से 4,02,089 ‘वक्फ बाय यूजर’ श्रेणी में आती हैं, लेकिन इनकी कानूनी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
इतनी बड़ी संपत्ति होने के बावजूद, केवल 1,088 वक्फ डीड पंजीकृत हैं और 26,676 निजी वक्फ संपत्तियां मौजूद हैं। यह प्रशासनिक अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
वक्फ प्रशासन का इतिहास और वर्तमान संकट
भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन विभिन्न विधायी सुधारों के माध्यम से विकसित हुआ है। वक्फ अधिनियम, 1995 और 2013 के संशोधनों के बावजूद, वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों को अवैध रूप से बेचा जा रहा है या नाममात्र कीमत पर निजी संस्थाओं को पट्टे पर दिया जा रहा है। इसका सीधा असर मुस्लिम समुदाय पर पड़ रहा है, क्योंकि यह संपत्तियां उनके धार्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए आरक्षित थीं।
अतिक्रमण और कानूनी विवाद
वामसी पोर्टल के अनुसार, वर्तमान में वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण के 58,890 मामले दर्ज हैं, और 31,999 मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से 16,140 मामले विशेष रूप से अतिक्रमण से जुड़े हैं। अकेले मुस्लिम याचिकाकर्ताओं द्वारा 3,165 मामले दायर किए गए हैं।
महत्वपूर्ण उदाहरण:
- भोपाल: सरकारी जमीन पर अवैध वक्फ कॉम्प्लेक्स निर्माण, 101 कब्रिस्तानों का रहस्यमय तरीके से गायब होना।
- हैदराबाद: तेलंगाना वक्फ बोर्ड के पास 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति, लेकिन 75% भूमि पर अतिक्रमण।
- मुंबई: महाराष्ट्र की 60% से अधिक वक्फ भूमि पर अवैध कब्जा।
- लखनऊ: वक्फ बोर्ड द्वारा दावा की गई 78% भूमि वास्तव में सरकारी स्वामित्व वाली।
- पटना: बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा हिंदू बहुल गांव में भूमि स्वामित्व का दावा।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024: सुधार या विवाद?
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है। इसके तहत:
- सभी वक्फ संपत्तियों का छह महीने के भीतर डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य।
- अनधिकृत अतिक्रमण और अवैध लेनदेन पर सख्त कार्रवाई।
- निर्णय प्रक्रिया में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना।
सामुदायिक प्रतिक्रिया और निष्कर्ष
विधेयक पर मुस्लिम समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। आम जनता, विशेषकर महिलाएं, इसे सुधारात्मक कदम मान रही हैं, जबकि कुछ प्रभावशाली समूह इसे वित्तीय खतरे के रूप में देख रहे हैं।
इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुस्लिम समुदाय अपनी संपत्तियों के न्यायसंगत प्रबंधन के लिए एकजुट होगा, या आंतरिक राजनीति और सत्ता संघर्ष के कारण यह समस्या बनी रहेगी?
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