Site icon Hindi &English Breaking News

प्रदेश में पहली बार टाकरी लिपि व संस्कृत भाषा पर त्रैमासिक प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू ऑनलाइन-ऑफलाइन मोड में सीख

शिमला, न्यूज व्यूज पोस्ट – भाषा एवं संस्कृति विभाग ने प्रदेश की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से आज एक अनूठी पहल की। ऐतिहासिक गेएटि थिएटर के सम्मेलन कक्ष में टाकरी लिपि व संस्कृत भाषा के मूलभूत ज्ञान पर आधारित त्रैमासिक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।

पहली बार एक मंच पर दो भाषाओं का प्रशिक्षण

कार्यशाला का उद्घाटन विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित ने दीप प्रज्वलित कर किया। टाकरी लिपि के प्रशिक्षण का दायित्व डॉ. किशोरी लाल चंदेल (सहायक प्रोफेसर, इतिहास) संभाल रहे हैं, जबकि संस्कृत भाषा का ज्ञान डॉ. मस्तराम शर्मा (सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक, संस्कृत अकादमी) प्रदान करेंगे।

ऑनलाइन-ऑफलाइन का मिला-जुला स्वरूप

यह कार्यशाला विशेष रूप से उन शोधार्थियों, छात्रों और बुद्धिजीवियों के लिए आयोजित की गई है, जो इन भाषाओं में रुचि रखते हैं। ऑनलाइन माध्यम से लगभग 170 प्रतिभागी जुड़े हैं, जबकि 40 से अधिक प्रतिभागी ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।

कार्यशाला का शेड्यूल:

संस्कृति को संजोने की दिशा में बड़ा कदम

निदेशक डॉ. पंकज ललित ने कहा कि यह कार्यशाला भाषा प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर है और आने वाले दिनों में प्रतिभागियों की संख्या में वृद्धि की संभावना है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों से इस प्रयास का हिस्सा बनने की अपील की।

इस अवसर पर विभाग के संयुक्त निदेशक श्री मंजीत शर्मा, श्रीमती कुसुम संघाईक और सहायक निदेशक श्री सुरेश राणा भी उपस्थित रहे।

Exit mobile version